Indian Constitution – The BlueCity News https://thebluecitynews.in Newespaper Mon, 06 Apr 2026 16:22:40 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://thebluecitynews.in/wp-content/uploads/2026/02/cropped-WhatsApp-Image-2026-02-17-at-9.52.32-PM-32x32.jpeg Indian Constitution – The BlueCity News https://thebluecitynews.in 32 32 गोपाल मिश्रा बने IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, एकमत समर्थन से मिला नया नेतृत्व https://thebluecitynews.in/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-ifwj-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f/ https://thebluecitynews.in/%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-ifwj-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f/#respond Mon, 06 Apr 2026 16:22:38 +0000 https://thebluecitynews.in/?p=13359 गोपाल मिश्रा बने IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, एकमत समर्थन से मिला नया नेतृत्व

नई दिल्ली, 6 अप्रैल 2026।
भारतीय पत्रकारिता जगत में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। गोपाल मिश्रा को इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) का राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुना गया है। यह निर्णय संघ के 27 राज्यों में से 14 राज्यों के निर्वाचक मंडल द्वारा लिया गया, जो संगठन के भीतर उनके प्रति व्यापक विश्वास को दर्शाता है।

चुनाव परिणामों की घोषणा जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ दिल्ली के कार्यालय, बी-35, निज़ामुद्दीन, नई दिल्ली में IFWJ के संविधान की धारा 49 के तहत की गई। यह निर्वाचन न केवल संगठन के लिए, बल्कि देशभर के पत्रकारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

गोपाल मिश्रा, दिवंगत डॉ. के. विक्रम राव का स्थान लेंगे, जिन्होंने पत्रकारों के अधिकारों और उनके कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। डॉ. राव 11 पुस्तकों के लेखक रहे और वेतन बोर्ड तथा प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य के रूप में उन्होंने 27 राज्यों के पत्रकारों के लिए बेहतर वेतन और कार्य स्थितियों को सुनिश्चित करने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

विशेष रूप से, 1975 का आपातकाल के दौरान प्रेस सेंसरशिप का विरोध करने के कारण उन्हें 13 महीने जेल में रहना पड़ा था। उनके इस साहसिक कदम को मान्यता देते हुए नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2016 में विज्ञान भवन में सम्मानित किया था। उनका निधन 12 मई 2025 को हुआ, जिसके बाद यह पहला बड़ा नेतृत्व परिवर्तन माना जा रहा है।

गोपाल मिश्रा का यह चयन ऐसे समय में हुआ है, जब पत्रकारिता जगत कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पारंपरिक विज्ञापन मॉडल के कमजोर पड़ने से आर्थिक अस्थिरता बढ़ी है, वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का बढ़ता प्रभाव न्यूज़रूम की कार्यप्रणाली को तेजी से बदल रहा है।

अपने संबोधन में गोपाल मिश्रा ने कहा कि आज पत्रकारों के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं—पहली, आर्थिक अनिश्चितता और दूसरी, AI का बढ़ता प्रभाव। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी पत्रकार की आजीविका बिना उचित विकल्प और संवाद के तकनीक के कारण प्रभावित न हो। साथ ही, डिजिटल युग में पत्रकारों को उनके कार्य का उचित पारिश्रमिक मिले, इसके लिए ठोस वेतन सुरक्षा की दिशा में काम किया जाएगा।

इस चुनाव की प्रक्रिया सितंबर 2025 में जोधपुर से शुरू हुई थी। चुनावी दस्तावेजों की जांच मुख्य निर्वाचन अधिकारी संतोष चतुर्वेदी (उत्तर प्रदेश), अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी सोमैया मामिदी (तेलंगाना) और मारूफ रज़ा (दिल्ली) द्वारा की गई।

घोषणा के दौरान IFWJ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह राठौड़, कोषाध्यक्ष रजत मिश्रा, सचिव पी. आनंदम, सचिव के. विश्वदेव राव तथा मध्य प्रदेश के राज्य अध्यक्ष सलमान खान शामिल थे। इसके अलावा जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ दिल्ली के कई सदस्य भी इस मौके पर मौजूद रहे।

इस अवसर पर ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने डॉ. विक्रम राव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए गोपाल मिश्रा को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त की कि वे संगठन को और अधिक सशक्त बनाएंगे।

गोपाल मिश्रा का पत्रकारिता में लंबा और समृद्ध अनुभव रहा है। उन्होंने द टाइम्स ऑफ इंडिया और नेशनल हेराल्ड जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में वरिष्ठ संपादकीय पदों पर कार्य किया है। इसके अलावा उन्होंने भारत का पहला इंटरनेट समाचार पोर्टल शुरू करने का भी श्रेय हासिल किया है।

वे पायनियर एम्प्लॉइज यूनियन के संस्थापक भी रहे हैं, जिसे पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरि द्वारा मान्यता प्रदान की गई थी। साथ ही, वे लंबे समय से भारतीय जनसंचार संस्थान में शिक्षण कार्य भी कर रहे हैं, जिससे उन्होंने नई पीढ़ी के पत्रकारों को तैयार करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उल्लेखनीय है कि IFWJ की स्थापना वर्ष 1950 में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई थी। यह गुटनिरपेक्ष देशों में सबसे बड़े पत्रकार संगठनों में से एक है और इसके 47 देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध हैं। इसी संगठन के प्रयासों से वर्ष 1956 में पत्रकारों के कार्य स्थितियों को लेकर देश का पहला संसदीय कानून अस्तित्व में आया था।

गोपाल मिश्रा के निर्वाचन के बाद देशभर से बधाइयों का सिलसिला भी शुरू हो गया। विभिन्न राज्यों के पत्रकार संगठनों और पदाधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके नेतृत्व में संगठन के और अधिक सशक्त होने की उम्मीद जताई।

कुल मिलाकर, यह कहा जा सकता है कि गोपाल मिश्रा का राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चयन भारतीय पत्रकारिता के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है, जो चुनौतियों के इस दौर में संगठन को नई दिशा और मजबूती प्रदान कर सकता है।

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राजस्थान की गौरवशाली विरासत को सम्मान दिलाने की दिशा में बड़ा कदमः राज्यसभा में सांसद राजेंद्र गहलोत ने राजस्थानी भाषा को संविधान 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग https://thebluecitynews.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0/ https://thebluecitynews.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0/#respond Sat, 04 Apr 2026 06:03:26 +0000 https://thebluecitynews.in/?p=13314 जोधपुर।
देश विदेश में बसे करोड़ों राजस्थानियों के गौरव एवं उनकी मातृभाषा राजस्थानी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने को लेकर राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने सदन अपनी मांग रखी।

राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने कहा कि राजस्थानी भाषा केवल एक बोली नहीं, बल्कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों राजस्थान वासियों के स्वाभिमान, पहचान और भावनाओं से जुड़ा हुआ विषय है। राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करना न केवल भाषा को सम्मान देगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा भी देगा।

गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार से विनम्रता के साथ आग्रह किया कि इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर प्राथमिकता के आधार पर सकारात्मक, संवेदनशील और समयबद्ध निर्णय लिया जाए। राजस्थानी भाषा राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास और लोकजीवन की आत्मा है। इसे संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करना करोड़ों राजस्थान वासियों की वर्षों पुरानी भावनाओं, उनके स्वाभिमान और पहचान को सम्मान देने जैसा होगा, साथ ही, यह निर्णय भारत की भाषाई विविधता को और अधिक सशक्त करते हुए “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को भी मजबूती प्रदान करेगा।

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