Rajya Sabha News – The BlueCity News https://thebluecitynews.in Newespaper Sat, 04 Apr 2026 06:03:28 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://thebluecitynews.in/wp-content/uploads/2026/02/cropped-WhatsApp-Image-2026-02-17-at-9.52.32-PM-32x32.jpeg Rajya Sabha News – The BlueCity News https://thebluecitynews.in 32 32 राजस्थान की गौरवशाली विरासत को सम्मान दिलाने की दिशा में बड़ा कदमः राज्यसभा में सांसद राजेंद्र गहलोत ने राजस्थानी भाषा को संविधान 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग https://thebluecitynews.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0/ https://thebluecitynews.in/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0/#respond Sat, 04 Apr 2026 06:03:26 +0000 https://thebluecitynews.in/?p=13314 जोधपुर।
देश विदेश में बसे करोड़ों राजस्थानियों के गौरव एवं उनकी मातृभाषा राजस्थानी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने को लेकर राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने सदन अपनी मांग रखी।

राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने कहा कि राजस्थानी भाषा केवल एक बोली नहीं, बल्कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों राजस्थान वासियों के स्वाभिमान, पहचान और भावनाओं से जुड़ा हुआ विषय है। राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करना न केवल भाषा को सम्मान देगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा भी देगा।

गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार से विनम्रता के साथ आग्रह किया कि इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर प्राथमिकता के आधार पर सकारात्मक, संवेदनशील और समयबद्ध निर्णय लिया जाए। राजस्थानी भाषा राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास और लोकजीवन की आत्मा है। इसे संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करना करोड़ों राजस्थान वासियों की वर्षों पुरानी भावनाओं, उनके स्वाभिमान और पहचान को सम्मान देने जैसा होगा, साथ ही, यह निर्णय भारत की भाषाई विविधता को और अधिक सशक्त करते हुए “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को भी मजबूती प्रदान करेगा।

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