Training Program – The BlueCity News https://thebluecitynews.in Newespaper Tue, 07 Apr 2026 18:09:49 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://thebluecitynews.in/wp-content/uploads/2026/02/cropped-WhatsApp-Image-2026-02-17-at-9.52.32-PM-32x32.jpeg Training Program – The BlueCity News https://thebluecitynews.in 32 32 काजरी जोधपुर में “शुष्क क्षेत्रों हेतु समेकित जल ग्रहण विकास और मृदा संरक्षण” पर सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू https://thebluecitynews.in/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%95/ https://thebluecitynews.in/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%95/#respond Tue, 07 Apr 2026 18:09:46 +0000 https://thebluecitynews.in/?p=13375 काजरी जोधपुर में “शुष्क क्षेत्रों हेतु समेकित जल ग्रहण विकास और मृदा संरक्षण” पर सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

जोधपुर। भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में “शुष्क क्षेत्रों हेतु समेकित जल ग्रहण विकास और मृदा संरक्षण” विषय पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल एवं मृदा संरक्षण की प्रभावी तकनीकों को बढ़ावा देना है।

उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेश पाल सिंह तँवर ने बताया कि काजरी द्वारा जल संग्रहण विकास और मृदा संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक शोध एवं प्रसार कार्य किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव पश्चिमी राजस्थान में मरुस्थलीकरण को रोकने में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। उन्होंने जल संग्रहण एवं मृदा संरक्षण विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भागीरथ बिश्नोई ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाना, मृदा एवं जल संरक्षण तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना तथा जल ग्रहण परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी में उनकी क्षमता को सुदृढ़ करना है। साथ ही उन्होंने सतत एवं जलवायु-अनुकूल प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. ओमप्रकाश मीणा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग की ओर से कार्यक्रम संयोजक श्रीमती अंजू मीणा भी उपस्थित रहीं।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जोधपुर एवं बीकानेर संभाग से 30 कनिष्ठ अभियंता भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र में काजरी के विभागाध्यक्षों एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपिका हाजोग द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रमिन्द्र चौधरी ने प्रस्तुत किया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम निदेशालय भू-संरक्षण विभाग द्वारा प्रायोजित है, जो शुष्क क्षेत्रों में सतत विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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डेयरी व्यवसाय में असीम संभावनाएं, वैज्ञानिक तरीके अपनाकर बढ़ाएं आय: कुलगुरु https://thebluecitynews.in/%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%82/ https://thebluecitynews.in/%e0%a4%a1%e0%a5%87%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%b5%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%82/#respond Tue, 07 Apr 2026 18:07:36 +0000 https://thebluecitynews.in/?p=13372 जोधपुर। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर में आयोजित सात दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ उत्साहपूर्वक किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. (डॉ) वीरेंद्र सिंह जैतावत ने कहा कि वर्तमान समय में शुद्ध डेयरी उत्पादों की बाजार में भारी मांग है। ऐसे में उद्यमी यदि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध करवाएं, तो वे अपना मजबूत ब्रांड स्थापित कर सकते हैं और आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि डेयरी उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और इसे छोटे स्टार्टअप के रूप में शुरू कर बड़े व्यवसाय में बदला जा सकता है। साथ ही प्रतिभागियों को पशुपालन की आधुनिक और वैज्ञानिक विधियों को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. विक्रम व्यास ने कहा कि डेयरी उद्योग गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि दूध के साथ-साथ गोबर, खाद और अन्य उत्पादों से भी अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने नस्ल सुधार, संतुलित पोषण और बेहतर प्रबंधन को इस व्यवसाय की सफलता का आधार बताया।

25 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से 25 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। केंद्र प्रभारी डॉ. प्रदीप पगारिया ने बताया कि इस सात दिवसीय प्रशिक्षण में डेयरी फार्मिंग प्रबंधन, उन्नत पोषण, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और दुग्ध उत्पादों के मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी दी जाएगी।

इस अवसर पर नोडल अधिकारी डॉ. प्रियंका स्वामी भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में जनसंपर्क अधिकारी डॉ. संगीता शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. प्रियंका, नीलिमा मकवाना, डॉ. मनीष बेड़ा, अनिल यादव तथा नरहरि जोशी सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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