काजरी जोधपुर में “शुष्क क्षेत्रों हेतु समेकित जल ग्रहण विकास और मृदा संरक्षण” पर सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
जोधपुर। भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में “शुष्क क्षेत्रों हेतु समेकित जल ग्रहण विकास और मृदा संरक्षण” विषय पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल एवं मृदा संरक्षण की प्रभावी तकनीकों को बढ़ावा देना है।
उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेश पाल सिंह तँवर ने बताया कि काजरी द्वारा जल संग्रहण विकास और मृदा संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक शोध एवं प्रसार कार्य किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव पश्चिमी राजस्थान में मरुस्थलीकरण को रोकने में स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। उन्होंने जल संग्रहण एवं मृदा संरक्षण विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भागीरथ बिश्नोई ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाना, मृदा एवं जल संरक्षण तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना तथा जल ग्रहण परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी में उनकी क्षमता को सुदृढ़ करना है। साथ ही उन्होंने सतत एवं जलवायु-अनुकूल प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. ओमप्रकाश मीणा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग की ओर से कार्यक्रम संयोजक श्रीमती अंजू मीणा भी उपस्थित रहीं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जोधपुर एवं बीकानेर संभाग से 30 कनिष्ठ अभियंता भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र में काजरी के विभागाध्यक्षों एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपिका हाजोग द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रमिन्द्र चौधरी ने प्रस्तुत किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम निदेशालय भू-संरक्षण विभाग द्वारा प्रायोजित है, जो शुष्क क्षेत्रों में सतत विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।












