जोधपुर, राजस्थान।
गांधीनगर (कालीबेरी) क्षेत्र में बीएपीएस अक्षरधाम पुरुषोत्तम स्वामी नारायण संस्था द्वारा एक भव्य मंदिर का निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह नया धार्मिक स्थल न केवल स्थापत्य कला की दृष्टि से अनोखा होगा, बल्कि अपनी भव्यता और आध्यात्मिक परिवेश के कारण जोधपुर का एक प्रमुख आकर्षण भी बनने जा रहा है।
इस निर्माणाधीन मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह जोधपुरी छीतर पत्थरों से बनाया जा रहा है, जिसमें लोहे का कोई प्रयोग नहीं किया गया है। मंदिर का आधार तल पूर्ण रूप से तैयार हो चुका है, और कुल मिलाकर परिसर का 90% सिविल कार्य पूरा कर लिया गया है।
अद्भुत शिल्प और वास्तु का संगम
यह मंदिर सिरोही घाट शैली में बनाए जा रहे 225 नक्काशीदार स्तंभों के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है। हर स्तंभ पर अलग-अलग डिज़ाइन में 3000 से अधिक नक्काशियाँ उकेरी गई हैं, जिनकी बनावट नीचे से चौड़ी और ऊपर से पतली है, जिससे इसकी संरचना बेहद आकर्षक और संतुलित प्रतीत होती है।
सोमपुरा शिल्पशास्त्र के नियमों के अनुसार तैयार किए जा रहे इस मंदिर की कुल ऊंचाई लगभग 125 फीट होगी। गर्भगृह के ऊपर लगाई जा रही पत्थर की जालियाँ, मंदिर की शिल्पकला में एक अनूठा आयाम जोड़ रही हैं।
विशाल परिसर और बहुआयामी उपयोगिता
करीब 40 बीघा भूमि (लगभग 14.5 एकड़) में फैले इस मंदिर परिसर में कुल 2 लाख वर्ग फीट का निर्माण हो रहा है। इसका मुख्य प्रवचन मंडप 16,000 वर्ग फीट क्षेत्रफल में निर्मित किया जा रहा है। परिसर में धार्मिक और सामाजिक उपयोग के लिए प्रवचन हॉल, सभा स्थल, रसोई, अतिथि गृह और उद्यान जैसी आधुनिक सुविधाओं का भी निर्माण चल रहा है।
आध्यात्मिकता के साथ समाज सेवा का केंद्र
इस पूरे निर्माण कार्य की निगरानी योगी प्रेमस्वामी जी द्वारा की जा रही है। बीएपीएस संस्था के अनुसार, जोधपुर में बन रहा यह पहला ऐसा मंदिर होगा जिसमें केवल जोधपुरी पत्थर का प्रयोग किया गया है और यह अपने आप में एक सांस्कृतिक विरासत बन जाएगा।
इस मंदिर का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है — इसे समाज सेवा, नैतिक मूल्यों की शिक्षा और आध्यात्मिक जागरूकता के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।











