चैनपुरा, न्यू नागौर रोड। स्थित श्री कांची कामकोटि पीठम (शंकर मठम) में आदि शंकराचार्य जी की 2535वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय द्वितीय महाकुम्भाभिषेकम महोत्सव का मंगलवार को भव्य समापन हुआ।
ब्रह्मलीन मृगेन्द्र सरस्वती जी के आशीर्वाद एवं शिवेंद्र आश्रम जी महाराज (राजलदेसर पीठ) के पावन सानिध्य में आयोजित इस उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक लाभ उठाया।
गादीपति राजेश गुर्जर ने बताया कि महोत्सव के तीसरे मंगलवार को विशेष धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें मुख्य रूप से कुंभाभिषेक एवं श्रीमद् भगवतपाद का शिष्यों सहित अभिषेक, भगवान चंद्र मौलीश्वर महादेव का दिव्य अभिषेक एवं दोपहर में यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद महाप्रसादी का आयोजन किया गया। इस महोत्सव को भव्य स्वरूप देने के लिए देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ऋत्विक (वैदिक विद्वान) जोधपुर पहुंचे थे। मध्याह्न काल में विशेष आहुतियों के साथ यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं।
दण्डी स्वामी शिवेंद्र आश्रम महाराज ने भगवान आदि शंकराचार्य की 2535वीं जयंती पर सनातन धर्म एवं श्री भगवान आदि शंकराचार्य विषय पर अपने आशीर्वचन दिए। स्वामीजी ने मर्मस्पर्शी व्याख्या करते हुए कहा कि मानव जीवन का मूल उद्देश्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान कर परमात्मा में लीन होना है। उन्होंने श्रीमद् भगवतपाद रचित विवेक चूड़ामणि के प्रमुख स्तंभों- विवेक, वैराग्य, षट्संपत्ति और मुमुक्षुत्व पर विस्तार से चर्चा कर भक्तों का मार्गदर्शन किया।












