जोधपुर। हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर श्री परशुराम महादेव मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में संत सेवा, धार्मिक अनुष्ठान एवं दीपमालिका का विशेष आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संत परंपरा, सनातन संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना रहा। आयोजन में संतों का सम्मान एवं सेवा-सत्कार करने के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
ट्रस्ट सचिव सत्यप्रकाश बोहरा ने बताया कि हरियाली अमावस्या भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व हमें पर्यावरण के संरक्षण, पौधारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट की ओर से धार्मिक एवं सामाजिक सेवा गतिविधियों का आयोजन किया गया।
संयुक्त हनुमान चालीसा पाठ और रामनाम माला का आयोजन
हरियाली अमावस्या के अवसर पर सत्यप्रकाश बोहरा एवं उनकी टीम के नेतृत्व में संयुक्त हनुमान चालीसा पाठ, रामनाम माला और संत सेवा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया और सामूहिक रूप से आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण किया।
आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान की आराधना करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके साथ ही रामनाम माला के माध्यम से श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में संतों के प्रति सम्मान और सेवा भावना को विशेष महत्व दिया गया।
51 संतों की सेवा एवं प्रसादी का आयोजन
कार्यक्रम के दौरान करीब 51 संतों के लिए प्रसादी तैयार कर उन्हें भोजन कराया गया। संतों का सेवा-सत्कार करते हुए आयोजकों एवं श्रद्धालुओं ने भारतीय संत परंपरा में निहित सेवा, त्याग और मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
संत सेवा को भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान प्राप्त है। संत समाज सदैव समाज को सदाचार, सत्य, प्रेम, करुणा, क्षमा और सद्भाव की प्रेरणा देता रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हरियाली अमावस्या के अवसर पर संतों की सेवा को धार्मिक आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
दीपमालिका से दिया आध्यात्मिक चेतना का संदेश
कार्यक्रम में दीपमालिका का भी आयोजन किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से श्रद्धा, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया गया। दीपमालिका ने पूरे आयोजन को भक्तिमय वातावरण प्रदान किया।
आयोजकों के अनुसार दीप केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश भी देता है। दीपमालिका के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और सकारात्मक सोच का प्रकाश फैलाने का आह्वान किया गया।
संत परंपरा ने हमेशा दिया मानवता का संदेश
ट्रस्ट सचिव सत्यप्रकाश बोहरा ने कहा कि भारतीय संत परंपरा ने सदियों से समाज को सेवा, त्याग, दया, क्षमा और मानवता का मार्ग दिखाया है। संतों ने समाज में व्याप्त भेदभाव और कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाते हुए प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि कबीर, संत रविदास, मीराबाई और गोस्वामी तुलसीदास जैसे संतों ने जनभाषा के माध्यम से अपने विचारों को आमजन तक पहुंचाया। उनकी वाणी ने समाज को सत्य, भक्ति, प्रेम और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। आज भी संत परंपरा के ये संदेश सामाजिक जीवन में उतने ही प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में सेवा, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जानी चाहिए।
हरियाली अमावस्या पर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
हरियाली अमावस्या को प्रकृति और हरियाली से जोड़कर देखा जाता है। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सत्यप्रकाश बोहरा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण के साथ-साथ लगाए गए पौधे की नियमित देखभाल का भी संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है। पौधे को वृक्ष बनने तक उसकी सुरक्षा और देखभाल करना भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधे की जिम्मेदारी लेकर उसकी नियमित देखभाल करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
आज बढ़ता प्रदूषण, घटती हरियाली और बदलता पर्यावरण मानव समाज के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना समय की आवश्यकता है।
‘हरयाळो राजस्थान’ अभियान से जुड़ने का आह्वान
कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के ‘हरयाळो राजस्थान’ अभियान का भी उल्लेख किया गया। इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश में हरियाली बढ़ाने, बड़े स्तर पर पौधारोपण को प्रोत्साहित करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
आयोजकों ने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ आमजन की भागीदारी भी आवश्यक है। यदि समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता पौधारोपण और पौधों की देखभाल में सुनिश्चित हो, तो राजस्थान को अधिक हरा-भरा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
हरियाली अमावस्या जैसे पर्व लोगों को प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर प्रदान करते हैं। धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ना भारतीय संस्कृति की प्रकृति-केन्द्रित सोच को भी दर्शाता है।
श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर किया सहयोग
आयोजन को सफल बनाने में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के लोगों ने सहयोग किया। कार्यक्रम में रामचंद्र पुरोहित, डॉ. आनंद राज पुरोहित, रामेश्वर व्यास, चेतन महानदानी, सतीश पुरोहित, ओमप्रकाश कल्ला, चंद्र प्रकाश चौहान, प्रफुल्ल कुमार पुरोहित, ओम प्रकाश व्यास, मंजू पुरोहित, संतोष व्यास, सरोज बोहरा, आनंद पुरोहित, अंकित पुरोहित, आशीष पुरोहित, कुलदीप सारस्वत, जगदीश सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
सभी ने संत सेवा, धार्मिक आयोजन और दीपमालिका कार्यक्रम में सहयोग करते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सेवा और पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरणादायी संदेश
हरियाली अमावस्या के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकारों को जोड़ने वाला रहा। संत सेवा, हनुमान चालीसा पाठ, रामनाम माला और दीपमालिका के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर समाज को सेवा एवं हरियाली की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई।
आयोजकों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को सदैव सम्मान दिया गया है। पेड़-पौधों, नदियों, पर्वतों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है। ऐसे में हरियाली अमावस्या जैसे पर्वों को पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से जोड़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और स्वच्छ पर्यावरण तैयार किया जा सकता है।
कार्यक्रम का समापन संतों के आशीर्वाद एवं श्रद्धालुओं के बीच सेवा, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ। आयोजन ने यह संदेश दिया कि धर्म और सेवा के साथ प्रकृति संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाकर ही समाज और पर्यावरण दोनों को बेहतर दिशा दी जा सकती है।













