जोधपुर। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर में आयोजित सात दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ उत्साहपूर्वक किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. (डॉ) वीरेंद्र सिंह जैतावत ने कहा कि वर्तमान समय में शुद्ध डेयरी उत्पादों की बाजार में भारी मांग है। ऐसे में उद्यमी यदि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध करवाएं, तो वे अपना मजबूत ब्रांड स्थापित कर सकते हैं और आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि डेयरी उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और इसे छोटे स्टार्टअप के रूप में शुरू कर बड़े व्यवसाय में बदला जा सकता है। साथ ही प्रतिभागियों को पशुपालन की आधुनिक और वैज्ञानिक विधियों को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. विक्रम व्यास ने कहा कि डेयरी उद्योग गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि दूध के साथ-साथ गोबर, खाद और अन्य उत्पादों से भी अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने नस्ल सुधार, संतुलित पोषण और बेहतर प्रबंधन को इस व्यवसाय की सफलता का आधार बताया।
25 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से 25 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। केंद्र प्रभारी डॉ. प्रदीप पगारिया ने बताया कि इस सात दिवसीय प्रशिक्षण में डेयरी फार्मिंग प्रबंधन, उन्नत पोषण, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और दुग्ध उत्पादों के मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक जानकारी दी जाएगी।
इस अवसर पर नोडल अधिकारी डॉ. प्रियंका स्वामी भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के अंत में जनसंपर्क अधिकारी डॉ. संगीता शर्मा ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. प्रियंका, नीलिमा मकवाना, डॉ. मनीष बेड़ा, अनिल यादव तथा नरहरि जोशी सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे।











