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कृषि क्षेत्र में चुनौतियों के त्वरित निवारण की आवश्यकता

क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति (जर्क) की बैठक संपन्न

जोधपुर। कृषि विश्वविद्यालय के डॉ बी आर चौधरी कृृषि अनुसंधान केन्द्र, मण्डोर में दो दिवसीय क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति (जर्क) की बैठक का समापन समारोह आयोजित हुआ। इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डाॅ.) वीरेंद्र सिंह जैतावत, कुलगुरु ने बैठक में वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारे सामने कृषि के क्षेत्र में कई चुनौतियाँ हैं, जिनमें सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट व जलवायु परिवर्तन प्रमुख है, साथ ही इन समस्याओं के निवारण की भी अत्यंत आवश्यकता है। इन समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने वैज्ञानिकों से क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान कार्य करने का आह्वान किया, ताकि पश्चिमी राजस्थान के किसानों की आय में वृद्धि हो सके। बैठक में निदेशक, अनुसंधान, डाॅ एम एम सुंदरिया ने कहा कि किसानों की समस्याओं का जो फीडबैक प्राप्त हुआ है, उस आधार पर इन समस्याओं के निदान हेतु आने वाली खरीफ में हमारे वैज्ञानिकों द्वारा अनुसंधान किया जावेगा।

उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र में लगातार बढ़ोतरी

कृषि क्षेत्र में चुनौतियों के त्वरित निवारण की आवश्यकता, जर्क बैठक संपन्न

जोधपुर।
डॉ. बी.आर. चौधरी कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति (जर्क) की बैठक का समापन समारोह संपन्न हुआ। बैठक में कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. (डॉ.) वीरेंद्र सिंह जैतावत ने वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में सिंचाई की कमी, मृदा स्वास्थ्य में गिरावट और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएं सामने हैं। इन चुनौतियों के त्वरित समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान कार्य करने का आह्वान किया, ताकि पश्चिमी राजस्थान के किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

निदेशक (अनुसंधान) एम.एम. सुंदरिया ने बताया कि किसानों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आगामी खरीफ सीजन में इन समस्याओं के समाधान हेतु वैज्ञानिकों द्वारा अनुसंधान किया जाएगा।

उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र में बढ़ोतरी

अतिरिक्त निदेशक (कृषि प्रसार) जी.आर. मटोरिया ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। इसके लिए अलग से पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों को समन्वय के साथ कार्य कर प्रभावी अनुसंधान करने की बात कही।

क्षेत्रीय निदेशक एम.एल. मेहरिया ने विस्तार कार्यकर्ताओं से अपील की कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

इनकी रही भागीदारी

बैठक में जोधपुर, बाड़मेर, बालोतरा, नागौर और फलौदी जिलों के संयुक्त निदेशक (कृषि), संयुक्त निदेशक (उद्यानिकी), उपनिदेशक (कृषि), उपनिदेशक (उद्यानिकी) सहित कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने भाग लिया।

इस दौरान खरीफ 2025 में हुए अनुसंधानों की समीक्षा की गई तथा खरीफ 2026 के लिए नए अनुसंधान कार्यक्रम तय किए गए। साथ ही काजरी जोधपुर द्वारा विकसित कृषि तकनीकों पर भी चर्चा की गई।


प्रमुख सिफारिशें (खरीफ 2026)

बैठक में किसानों के लिए निम्नलिखित नई किस्में एवं उन्नत तकनीकों को ‘खरीफ पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज’ में शामिल करने हेतु अनुमोदित किया गया—

  1. बाजरा की बायो-फोर्टिफाइड हाइब्रिड किस्म एचएचबी-299
  2. तिल में खरपतवार नियंत्रण हेतु मेटाक्लोर 50% ईसी का उपयोग तथा 25-30 दिन बाद निराई
  3. बाजरा में ब्लास्ट रोग नियंत्रण के लिए स्यूडोमोनास फ्लूरोसेन्स का छिड़काव
  4. बैंगन में बेहतर अंकुरण के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन से बीजोपचार
  5. अरंडी में जिंक सल्फेट व फेरस सल्फेट का उपयोग कर उत्पादन में वृद्धि
  6. अरंडी में जड़ गलन व उकठा रोग नियंत्रण हेतु उन्नत रासायनिक बीजोपचार
  7. जैविक एजेंट्स (बैसिलस, ट्राइकोडर्मा आदि) के माध्यम से रोग प्रबंधन तकनीक

निष्कर्ष

बैठक में कृषि अनुसंधान को क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप मजबूत बनाने, नई तकनीकों को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए ठोस रणनीति पर जोर दिया गया।

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