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मनुष्य जन्म को धर्म, श्रद्धा और तप से सार्थक बनाना ही सच्ची बुद्धिमानी – डॉ. मुनि शांति प्रिय सागरसंबोधि धाम में मेडिटेशन व प्रवचन कार्यक्रम आयोजित

मनुष्य जन्म को धर्म, श्रद्धा और तप से सार्थक बनाना ही सच्ची बुद्धिमानी – डॉ. मुनि शांति प्रिय सागर
संबोधि धाम में मेडिटेशन व प्रवचन कार्यक्रम आयोजित

जोधपुर, 16 मार्च। डॉ. मुनि शांति प्रिय सागर महाराज ने कहा कि संसार में चार चीजें अत्यंत दुर्लभ हैं—मनुष्य जीवन, धर्म वाणी का श्रवण, धर्म पर श्रद्धा और तप-त्याग से युक्त जीवन। उन्होंने कहा कि ये चारों इसलिए दुर्लभ कही गई हैं क्योंकि ये हर किसी को आसानी से प्राप्त नहीं होतीं और यदि मिल भी जाएं तो उन्हें समझना और निभाना बहुत कठिन होता है।

मुनि प्रवर कायलाना रोड स्थित संबोधि धाम में आयोजित मेडिटेशन और प्रवचन कार्यक्रम में साधक भाई-बहनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अनगिनत योनियों में भटकने के बाद मनुष्य जन्म मिलता है और केवल मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो सोच-समझकर धर्म, साधना और आत्मकल्याण का मार्ग अपना सकता है।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सच्चे संतों और आचार्यों की धर्म वाणी सुनने का अवसर नहीं मिलता। यह भी पूर्व जन्मों के अच्छे कर्मों का परिणाम होता है। अनेक लोग धर्म सुनते तो हैं, लेकिन सच्ची श्रद्धा और विश्वास बहुत कम लोगों के मन में जागता है। श्रद्धा होने पर ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

मुनि शांति प्रिय सागर ने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में संयम, तप, त्याग और साधना के मार्ग पर चलना कठिन हो गया है। इच्छाओं और मोह को छोड़ना हर किसी के बस की बात नहीं है। इसलिए मनुष्य जन्म मिलने पर उसे धर्म, श्रद्धा, योग, मेडिटेशन और तप से सार्थक बनाना ही सच्ची बुद्धिमानी है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम एक घंटा योग और मेडिटेशन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर, मन और आत्मा तीनों को संतुलित करता है। योग से शरीर स्वस्थ रहता है, मेडिटेशन से मन शांत होता है और दोनों मिलकर जीवन में परम आनंद का अनुभव कराते हैं।

उन्होंने बताया कि मेडिटेशन से मन की बेचैनी और तनाव कम होता है, विचारों में स्पष्टता आती है, धैर्य और सहनशीलता बढ़ती है तथा भावनाओं पर नियंत्रण विकसित होता है। इससे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित रहकर सही निर्णय ले सकता है।

कार्यक्रम के दौरान मुनि प्रवर ने साधकों को आरोग्य लाभ के लिए योग क्रियाओं का अभ्यास कराया तथा आत्मिक आनंद के लिए पंच परमेष्ठी मंत्र के साथ मेडिटेशन करवाया।

कार्यक्रम में मुकेश डागा, मंजू जैन, संपत सेन, विनोद प्रजापत, शेखर जैन, राजीव जायसवाल और भावना जायसवाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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