जोधपुर। धनतेरस की पूर्व संध्या पर सूर्यनगरी जोधपुर में दीपावली की रौनक अपने अनूठे अंदाज में देखने को मिली। दीपावली के स्वागत में शहर की ऐतिहासिक धरोहर तूरजी का झालरा हजारों दीपों की सुनहरी रोशनी से जगमगा उठा। भीतरी शहर स्थित इस ऐतिहासिक बावड़ी पर लगातार पांचवें वर्ष ‘लाइटिस्तान’ के नाम से भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 5 हजार से अधिक दीप प्रज्वलित कर पूरे बावड़ी परिसर को रोशनी से सजाया गया। दीपों की जगमगाहट के बीच तूरजी का झालरा किसी खूबसूरत रोशनी के महल जैसा नजर आया।
‘लाइटिस्तान’ बना दीपोत्सव का खास आकर्षण
तूरजी का झालरा पर आयोजित ‘लाइटिस्तान’ इस वर्ष भी शहरवासियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। हजारों दीपों की कतारों से सजी बावड़ी की ऐतिहासिक सीढ़ियां, दीवारें और आसपास का परिसर बेहद मनमोहक दिखाई दे रहा था। पानी में प्रतिबिंबित होती दीपों की रोशनी ने इस नजारे की खूबसूरती को और बढ़ा दिया। ऐसा लग रहा था मानो पूरी ऐतिहासिक बावड़ी रोशनी के उत्सव में शामिल हो गई हो। इस अनूठे आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में जोधपुरवासी, युवा, परिवार और देश-विदेश से आए पर्यटक पहुंचे। लोगों ने दीपों की रोशनी के बीच इस ऐतिहासिक धरोहर की खूबसूरती को निहारा और यादगार पलों को अपने कैमरों में कैद किया। सोशल मीडिया पर भी ‘लाइटिस्तान’ की जगमगाती तस्वीरें और वीडियो आकर्षण का केंद्र बने।
पांच वर्षों से रोशन हो रही परंपरा
‘लाइटिस्तान’ के नाम से शुरू हुआ यह दीपोत्सव अब जोधपुर की दीपावली से जुड़ी एक खास पहचान बनता जा रहा है। आयोजक शैलेश भुरानी के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल ने लगातार पांचवें वर्ष भी भव्य रूप लिया। दीपदान के माध्यम से भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और दीपावली के पारंपरिक महत्व को उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस आयोजन में लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई और दीप प्रज्वलित कर खुशहाली, सकारात्मकता एवं प्रकाश का संदेश दिया। हजारों दीपों की सामूहिक रोशनी ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं की खूबसूरती को एक साथ प्रस्तुत किया।
ऐतिहासिक धरोहर को नई पहचान देने की पहल
‘लाइटिस्तान’ का उद्देश्य केवल दीपावली का उत्सव मनाना ही नहीं, बल्कि जोधपुर की ऐतिहासिक धरोहरों, स्थापत्य कला, पुरानी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना भी है। तूरजी का झालरा जैसे ऐतिहासिक स्थलों को इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पहचान मिलती है। साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के बीच जोधपुर की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों को लोकप्रिय बनाने में भी मदद मिलती है। आयोजन को सफल बनाने में प्रशासन, नगर निगम, शहर के विधायक सहित विभिन्न स्तरों पर सहयोग रहा। पांच वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा ‘लाइटिस्तान’ अब केवल एक दीपोत्सव नहीं, बल्कि जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान, सामूहिक सहभागिता और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण का खूबसूरत उदाहरण बन गया है। हजारों दीपों से जगमगाता तूरजी का झालरा एक बार फिर यह संदेश दे गया कि जब परंपरा, संस्कृति और सामूहिक प्रयास एक साथ आते हैं, तो रोशनी का यह उत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की पहचान बन जाता है।












