जोधपुर में पारंपरिक धींगा गवर महोत्सव की पूर्व संध्या पर शनिवार रात पूरे शहर में आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। सरोवरों और भीतरी शहर में तीजणियों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां महिलाओं ने गवर-ईसर के पारंपरिक गीतों पर नृत्य कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।


भीतरी शहर के प्रमुख पदमसर तालाब सहित कई स्थानों पर रात 8 बजे से ही गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ महिलाएं पहुंचीं। पारंपरिक वेशभूषा और सोने-चांदी के आभूषणों में सजी तीजणियों ने पूरे माहौल को रंगीन बना दिया।
लोटियों के इस उत्सव में हल्दी-मेहंदी थीम पर सजे गवर-ईसर, मीराबाई का रूप धारण किए पात्र, तलवारें लहराती सुहागिनें और पालकी में नन्ही दुल्हन की झांकी आकर्षण का केंद्र रहीं।
सुनारों का बास और मोती चौक सहित कई क्षेत्रों में लोटियों की खास रौनक देखने को मिली। तीजणियां गवर माता को जल अर्पित करने के लिए सोने-चांदी की लोटियां लेकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच सरोवरों तक पहुंचीं। केरल थीम, तिरंगा साफा और श्रीनाथजी के स्वांग भी आकर्षण का केंद्र बने।


रविवार को मुख्य उत्सव और भी धूमधाम से मनाया जाएगा। हाथी चौक, चाचा की गली और ब्रह्मपुरी सहित 15 से अधिक स्थानों पर गवर माता विराजित होंगी, जहां देर रात तक गीत-नृत्य का आयोजन होगा। चार प्रहर की आरती के साथ 16 दिनों के पूजन का समापन किया जाएगा।
मेला समिति द्वारा गवर माता को 11 किलो तक स्वर्णाभूषणों से सजाया जाएगा और दो मण से अधिक मेवे व भांग से बनी पारंपरिक “मोई” प्रसादी वितरित की जाएगी। शहर के विभिन्न समाजों और सैकड़ों महिलाएं इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम 🚓
भीतरी शहर में 30 से अधिक पुलिस नाके लगाए गए हैं। सीसीटीवी निगरानी, वीडियो रिकॉर्डिंग और नाइट विजन ड्रोन के जरिए सुरक्षा को मजबूत किया गया है। साथ ही पुलिस द्वारा महिलाओं को सुरक्षा के लिए RajCop Citizen App की जानकारी भी दी जा रही है।
इस तरह, जोधपुर का धींगा गवर महोत्सव आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर पूरे शहर को रंगों और भक्ति में सराबोर कर रहा है।












